समय-रथ

अस्ताचल में उतरने के पूर्व सूर्यदेव कुछ पल के लिए रुके, पूर्वी क्षितिज से पश्चिमी छोर तक के यात्रा-पथ को निहारा, कुछ गंभीर हुए एवं तत्पश्चात् क्षणभर में ओझल हो गए। डूबने से पूर्व आखिर इस मार्ग को…

चार अंगुल नीचे

सभी ग्रह-नक्षत्रों की प्रभा छीनकर सूर्य ने आकाश के पूर्वी छोर पर आधिपत्य किया तो समूचा कुरूक्षेत्र प्रकाश से नहा गया। ऐड देकर उनके सारथी अरुण ने रथ आगे किया तो रथ के पार्श्व भाग में खड़े दिनकर…

तुम कहाँ हो माँ ?

जाने वे कैसे लोग होते हैं जो कुछ नहीं करते एवं सब कुछ पा जाते हैं एवं फिर ताउम्र सबको सीख देते हैं कि सफल होने के यह गुण है, वह गुण हैं। वे लोग भी तो दुनियां…

असल मुनाफ़ा

भोर होते ही सौदागर ने पेड़ से बंधा अपना घोड़ा खोला, उसकी पीठ थपथपायी, दाना-पानी दिया एवं देखते ही देखते पेड़ के पास रखे इत्र के सातों कुप्पे उसकी पीठ पर लाद दिये। कुछ और सामान जैसे दो…

अहसास

बहुत  पुरानी  कहानी  है। हजार साल से भी पुरानी, संभव है इससे भी अधिक पुरानी हो।  न राजा का नाम पता है, न देश का। हाँ, यह बात तय है कहानी प्राचीन आर्यावर्त क्षेत्र के किसी देश की…