सूर्य अंगड़ाई तोड़ते हुए क्षितिज से काफी ऊपर उठ आया था। सर्दियों में लोग अजगर की तरह निश्चेष्ट पड़े रहते हैं। रईस लोग मर्जी आए तब उठें, कामगारों को तो दिहाड़ी की चिंता ही उठा देती है। हर…
कुरजाँ
सूर्यदेव उदयांचल पर आरूढ़ हुए ही थे कि पक्षियों ने कलरव कर उनका यशोगान किया, पेड़-पौधों ने पत्तों पर ओस की बूंदों को धारण कर उन्हें जलांजलि दी तो खुशबू चुराती ताजी हवाओं ने भी फूलों की कुछ…
लकीरें
वह अपने माँ-बाप की इकलौती संतान थी। माँ-बाप ने उसे नाज़ों से पाला था, वह उनकी आँखों की पुतली थी। शादी के छः वर्ष बाद हुई थी वह। तब डाॅक्टर ने उसके पिता को बताया था, मिसेज मेहरा…
