खुद्दारी

दिनेश बाबू आज फिर लेट हो गये। दिनेश बाबू सदैव प्रयत्नरत रहते कि ऑफिस समय पर पहुँचे, लेकिन मत्थे चढ़ी गृहस्थी की समस्याएँ अक्सर देरी कर देती। अभी दस रोज पहले ही सेठ अचलनाथ ने उन्हें लताड़ पिलाते…

या में दो न समाय

दिसम्बर की कंपकंपाती ठण्ड में मावठ के दिन आते ही ठण्ड दूनी हो जाती है। हड्डियों के दर्द के चलते बूढ़े इन दिनों बहुत परेशान  हो जाते हैं। बूढ़ी हड्डियों को चलने के लिए सूरज की गर्मी तो…

कुदरत

चांद को विदा कर सूरज पूर्वी छोर से उठा तो समूचा जगत् क्षणभर में क्रियाशील हो गया। मनुष्य ने सूर्यनमस्कार कर उसका अभिनंदन किया तब भी वह चुप देखता रहा। अन्य सभी तो अपने कार्यों पर लग गए,…

रोशनदान

नित्य की तरह ऑफिस से घर पहुंचा तब तक सांझ का झुरमुटा फैल चुका था। घर के ठीक सामने स्थित बगीचे में खड़े नीम, पीपल आदि ऊंचे पेड़ों पर पक्षियों का शोर बढ़ने लगा था। मैंने दरवाजा खोलकर…

प्रतिनिधि

ज्ञान-वृद्ध सूर्य क्षितिज के उस पार अस्ताचल में उतरने का मन बना ही रहे थे कि सांझ ने छिछोरी चुहिया की तरह बिल से मुँह बाहर निकाला। अवसर मिलते ही वह बाहर आने को यूँ उतावली थी जैसे…

अहसास

बहुत  पुरानी  कहानी  है। हजार साल से भी पुरानी, संभव है इससे भी अधिक पुरानी हो।  न राजा का नाम पता है, न देश का। हाँ, यह बात तय है कहानी प्राचीन आर्यावर्त क्षेत्र के किसी देश की…

पिशाच

विशालकाय ‘थार’ रेगिस्तान के सिंहद्वार ‘जोधपुर’ शहर के बारे में तो अनेक लोग जानते हैं लेकिन बहुत कम लोग इस तथ्य को जानते हैं कि यहाँ के लोग जितने बातूनी होते हैं उतने ही पेटू भी। यहाँ के…

तस्वीर

किसी दिवंगत व्यक्ति की तस्वीर देखकर कैसा लगता है ? और अगर वह व्यक्ति आपका अंतरंग हो तो ? इस कमरे में खड़े होकर प्रद्युम्न की तस्वीर को देखना मानो उस सम्पूर्ण इतिहास को उलटने जैसा है जिसे…

चिड़ी का बाप

दिन अस्त हुआ तो दिवाकर ने दीर्घायु वृद्ध की तरह अनुभवों की गठरी अपने कंधे पर लादी एवं चुपचाप अस्ताचल में उतर गए। जाते-जाते पहाड़ी के उस पार हवाओं से आंख चुराकर निशिनाथ के कान में उन्होंने जाने…

चिह्न

पचपन पूरे होने को आए, भगवान झूठ ना बुलवाए, आज भी मैं उतना ही डरता हूँ जितना बचपन में डरता था। भूत-प्रेतों का प्रसंग चल पड़े अथवा ऐसे विषयों पर चर्चा से अब भी रोंगटे खड़े हो जाते…

बोनस

सूर्य उदयाचल से ऊपर उठे एवं धूप दीवारों पर उतरने लगी तब तक मैं नहा धोकर तैयार था। बसंत की सुबह कितनी मनभावन होती है। शीतल सुखदायिनी वायु एवं झूमते वृक्ष हृदय को आनंद से सराबोर कर देते…

नेति-नेति

उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के तट पर बैठे चार भूत आपस में बतिया रहे थे। गहन अंधेरी रात्रि का एक प्रहर बीत चुका था। कोई एक बजा होगा। दिसम्बर मासांत की कड़कड़ाती सर्दी में हवाओं की सांय-सांय…