मेरा अनुज ‘कमल’ ऐसे हैरतअंगेज कारनामे करता कि मैं विस्मय से ठगा रह जाता। बचपन में एक बार सिर्फ दो रुपये की शर्त पर मालगाड़ी के नीचे दुबक कर निकल गया। आश्चर्य की बात यह थी कि शर्त…
अमरूद का पेड़
जैसे महाजन अपने बढ़ते धन को देखकर खुश होता है, किसान अपने लहलहाते खेतों को देखकर खुश होता है, माता अपने प्रिय पुत्र को देखकर खुश होती है, नवीनजी अपने बाहर आँगन पर लगे अमरूद के पेड़ को…
पशु-मानव
कादिर भाई, पाॅकिटमार के सितारे इन दिनों ठीक नहीं थे। पिछले पाँच रोज से कोई आमदनी नहीं हुई, एक भी जेब पर हाथ नहीं मार सके। सब दिन होत न एक समान। वैसे उनकी अंगुलियों का कमाल कम…
